पीएम मोदी के द्वारा अंडमान निकोबार में सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल का उद्घाटन

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अंडमान-निकोबार को सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल का उद्धघाटन किया. ये फाइबर केबल चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर तक समुद्र के अंदर बिछाई गई है, जिसकी मदद से अंडमान में अब इंटरनेट की स्पीड काफी तेज होगी. पीएम मोदी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से अंडमान के लोगों को ईज़ ऑफ लिविंग की सुविधा मिलेगी. सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल (SOFC का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि करीब डेढ़ साल में इसका काम पूरा किया गया है. स्वतंत्रता दिवस से पहले ये लोगों के लिए ये उपहार है. पीएम ने कहा कि समुद्र में सर्वे किया गया, केबल को बिछाना और उसकी क्वालिटी मेंटेन करना आसान नहीं था. बरसों से इसकी आवश्यकता थी लेकिन काम नहीं हो पा रहा था. इस प्रोजेक्ट के बारे में पीएम ने कहा कि कनेक्टविटी अच्छी होगी तो टूरिस्ट अधिक वक्त तक वहां रुक पाएंगे, जिससे रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे. पीएम ने कहा कि ये एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत अंडमान की भूमिका अधिक है और आगे भी बढ़ेगी. सरकार की ओर से आइलैंड डेवलेपमेंट कमेटी का गठन हुआ और तेजी से प्रोजेक्ट को पूरा किया जा रहा है. अंडमान में सबमरीन फाइबर केबल से 3-4 सेकेंड में डाउनलोड हो सकेंगे 40 हजार गाने,
पीएम मोदी ने आगे कहा-‘आज देश आत्मनिर्भर भारत अभियान में आगे बढ़ रहा है, इस लिहाज से पोर्ट डेवलेपमेंट-वाटर वे को मजबूत किया जा रहा है. साथ ही नदियों को पोर्ट से जोड़ने का काम किया जा रहा है और सभी कानूनी अड़चनों को दूर करने में किया जा रहा है.’
प्रधानमंत्री मोदी हाई स्पीड इंटरनेट प्रोजेक्ट के फायदे भी बताए. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई हो, टूरिज्म से कमाई हो, बैंकिंग हो, शॉपिंग हो या तेली-मेडिसिन दवाई हो, अब अंडमान निकोबार के हज़ारों परिवारों को भी ये ऑनलाइन मिल पाएंगी. आज अंडमान को जो सुविधा मिली है, उसका बहुत बड़ा लाभ वहां जाने वाले टूरिस्टों को भी मिलेगा. बेहतर नेट कनेक्टिविटी आज किसी भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन की सबसे पहली प्राथमिकता हो गई है बता दें कि चेन्नई से होते हुए ये केबल स्वराज द्वीप, लिटिल अंडमान, कार निकोबार, कामरोता, ग्रेट निकोबार, लॉन्ग आइलैंड, रंगत में जाएगी. जिससे अंडमान निकोबार को तेज इंटरनेट मिल पाएगा. समुद्र में केबल बिछाने के लिए खास तरह के जहाजों का इस्तेमाल किया जाता है. ये जहाज अपने साथ 2,000 किलोमीटर लंबी केबल तक ले जा सकते हैं. जहां से केबल बिछाने की शुरुआत होती है, वहां से एक हल जैसे इक्यूप्मेंट का इस्तेमाल करते हैं, जो जहाज के साथ-साथ चलता है. काफी मेहनत के बाद ये कार्य संभव हो पा रहा है.

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